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कोरोना

एक जरूरी ऐलान। नगर वासियों को सुचित किया जाता है कि आप के शहर में करोना घुस गया है आज तारिख से आप सभी अपने घरों में बंद हो जायं तथा मेन गेट पर एक बड़ा सा मजबूत ताला जड़ दें। । ऐसे तो करोना को पकड़ने के लिए पुलिस बल को तैनात किया गया है लेकिन करोना इतना शातिर है कि हर किसी को चकमा देकर बचकर निकल जाता है। यदि किसी व्यक्ति को करोना दिखाई दे तो इसकी सूचना अविलंब निकटवर्ती थाना को दी जाय। इतना याद रहे कि करोना दो से अधिक आदमी के समूह पर हमला करता है । अतः सामुहिक रूप से करोना को पकड़ने या खोजने की चेष्टा न करें। जो कोई इस आदेश का उल्लंघन करेगा उसे दोषी माना जाएगा। दोषियों को आर्थिक दंड के साथ साथ जेल भी भेजा जाएगा। जैसे ही यह ऐलान हुआ गांव में सभी की उत्सुकता करोना को देखने की होने लगी सभी मिलकर विचार करने लगे कि करोना को कैसे पकड़ा जाय। तभी पुलिस बल की गाड़ी आती दिखाई दी। सबों ने आवाज लगाईं , करोना डाकू मुर्दाबाद, पुलिस प्रशासन जिंदाबाद। तबतक पुलिस गाडी पास आ गयी। पुलिस—अरे, काहे हल्ला करता है जी। गुदड़ी कहता है—स…स…..र हमलोग करोना को पकड़ने का सोच रहे हैं। पुलिस…….अरे बुरबक ! तु कोनची है रे, जब राईफल, लाठी लेकर हमनी नहीं पकड़ सक रहे है, उ सरबा फौजी लोग को भी चकमा दे दिया तो तुलोग कौची है। ई सब बात को समझो। अरे, एतना भीड़ में त करोना औरो आ जाएगा , चलो सब अपना-अपना घर में। रमन पुछता है सर…करोना कैसा दिखता है? पुलिस समझाती है—-अ……रे उ दिखता थोड़े न है, अगर दिखता त हमलोग उसको पकड़ नहीं लेते। मोहन पुछता है कि जब दिखाई नहीं देता है तो वह क्या कर लेगा। पुलिस कहती है देखो उ जब पकड़ेगा न तब दस बारह दिन तो पते नहीं चलेगा। उसके बाद बुखार लगेगा और छिंक, खांसी होगा फिर एक सप्ताह के बाद ट्यों बोल जाओगे। खाली तुम्हीं मरता त कोई बात नहीं था लेकिन तुम जिसके साथ रहेगा, खाएगा, बतियाएगा यहां तक कि हाथ मिलाएगा सब शमशाने घाट पहुंचे गा। समझा न, अब जाओ अपना- अपना घर। शर्मा बोला- दरोगा साहेब लाईन बाजार में जो एतना डागडर (डाक्टर) लाईन लगाकर बैठा है, ऊ इलाज नहीं करेगा, आप तो ऐसे डरा रहे हैं जैसे कोई आतंकवादी आ गया है। दरोगा जी—– अरे होशियार बनता है एक्के डंटा में ठीक हो जाएगा। (डांटते हुए)चल घर में । गुदड़ी, राम, शर्मा सभी लोग अपने अपने घरों में चले गए।
दुसरा ऐलान
आप सभी व्यापारियों को सुचित किया जाता है कि करोना नामक शातिर आतंकवादी चीन से भारत में घुस गया है। सीमा पर सेना को अलर्ट पर रखा गया था लेकिन इस दुर्दांत वायरस आतंकवादी सुरक्षा को धता करते हुए आपके शहर में घुस आया है। खुफिया एजेंसी ने जानकारी दी है कि वह किसी दुकान में घुसने के ताक में है। इसके मद्देनजर सभी व्यवसायियों को यह सलाह दी जाती है कि अपने दुकान का शटर डाउन कर दें और बंद शटर के अंदर से ही सारा व्यवसाय करें। जो भी व्यवसायी ऐसा करते नहीं पाए जाएंगे कड़े दंड के भागी होंगे।
इस सूचना के बाद धड़ाधड़ दुकान के शटर डाउन होने लगे। दुसरे दिन शहर में सन्नाटा छा गया सभी व्यापारी एक दूसरे से मोबाइल से संपर्क करने लगे। श्याम ने मोहन को फोन लगाया, पूछा-क्या हाल है? कहीं आपके दुकान में करोना तो नहीं घुस गया? दुकान के अंदर से मोहन ने जवाब दिया- यार, करोना क्या है, घोषणा भी अजीब है, दुकान के अंदर बंद रहो और सारा दुकानदारी करते रहो। जब शटर डाउन है तो दुकानदारी कैसे होगी? श्याम-मेरे तो कई ग्राहक घूम रहे हैं लेकिन मेरे दुकान का शटर डॉउन है तो उन्हें समझ में नहीं आ रहा है। तभी एक दवा व्यवसाई रघुनंदन फोन करता है-क्या हाल है श्याम भाई? किसी व्यवसाई को करोना तो नहीं पकड़ा है। यदि ऐसा हो जाए तो दवाई मुफ्त में ले जाना। श्याम- क्या दवा दुकान में करोना नहीं घुसता है? आश्चर्य है, करोना दवाईदुकान में नहीं आ रहा। रघुनंदन कहता है यह तो सरकार जाने यार, अपन को तो बिजनेस से मतलब है। इ करोना सिर्फ दवाई से ही डरता है। इतने में एक हार्डवेयर व्यापारी डरता हुआ मोहन सिंह के यहां पहुंचता है- मोहन भाई टीवी में समाचार चल रहा है कि करोना कटिहार में घुस गया है। डॉक्टर की पूरी टीम गई, है वह भी एंबुलेंस के साथ। उधर पुलिस ने 3 किलोमीटर का दायरा नापते हुए एरिया को सील बंद कर दिया है। हमारी हालत तो बहुत खराब हो गई है, कहीं हमारे दुकान में आ गया तो क्या होगा। तभी दूरदर्शन पर समाचार चलता है कि मुंह में मास्क लगावे हाथ को हर 2 घंटे पर साबुन से धोते रहें और सेनीटाइज करते रहें सैनिटाइजर दवा की दुकान से लेकर पास में रखें। दो गज की दूरी बनाए रखें। तभी मुन्ना शुक्ला भी पहुंच गये। कहते हैं समझ में नहीं आ रहा भाई यह करोना रहता कहां है, दुकान में, मकान में, रोड पर, सड़क पर या पेड़ पर। पवन पाण्डेय भी आ पहुंचे ।मोहन तपाक से कहा अरे कितना नजदीक आइएगा, दुरी बनाइए। रघुनंदन- ठीक कह रहे हैं मोहन भैया, दो गज की दूरी रहेगा न त करोना बीचेबीच निकल जाएगा पाण्डेय जी-यहां स्प्रे नहीं हुआ है क्या? मेरे यहां तो पूरे मोहल्ले को स्वास्थ्य विभाग वालों ने स्प्रे कर दिया है घर, दुकान, सड़क, पेड़ सभी जगह। मेरे मोहल्ले से करोना भाग गया। अब हमलोग आराम से अपने दुकान खोल सकते हैं। तभी दिगंबर कहता है अरे भैया, मधुबनी बाजार में तो करोना मिल गया। पुलिसवाले पकड़ने गई है। सुभाष कहता है क्या! करोना मिल गया, अच्छा है अब पुलिस का डंडा खाएगा न तब सारी सच्चाई सामने आ जाएगी। पवन पाण्डेय कहते है तुम भी अजीब हो भाई, करोना कोई आदमी है क्या, जो पुलिस पकड़ेगी। अरे पुलिस गई होगी लोगों को घर में घुसाने के लिए। अपना तो धंधा ही चौपट हो गया लेकिन ताज्जुब है करोना राशन दुकान, सब्जी दुकान, दूध के दुकान में नहीं घुसेगा और हमारे दुकान में घुस आएगा!
एक थाना में पुलिसवाले आपस में चर्चा कर रहे हैं। मुंशीजी-सर आजकल मारपीट बंद हो गया है क्या ? कोई केस नहीं हो रहा है। आमदनी पूरा खत्म हो गया। कमाल करते हैं मुंशी जी। लोग घर से बाहर निकल ही नहीं रहा है तो झगड़ा लड़ाई का होगा। मिश्राजी कहते हैं ई सरबा करोना परेशान करके रख दिया है, न दिन को चैन है न रात को। हमेशा करोना खोजो। उसको खोजते खोजते चार महीने से परेशान हैं न करोना मिल रहा है, न आमदनी हो रही है। चाय-काफी, पान, नाश्ता सब दुकान बंद है। अब भगवाने मालिक है। शर्माजी कहते हैं-का आफत आ गया है, लोग घर से बाहर नहीं निकल रहा है अगर कोई सड़क पर जाता है त मुंह झांकले रहता है। एक दो बिना मास्क या बिना हेलमेट वाला पकड़ाता भी है तो एक दर्जन हमलोग रहते हैं उसमें का आमदनी होगा। घर से खबर आया है कि वाईफ की तबीयत ठीक नहीं है। कौनो गाड़ी भी नहीं है। अभी कौनो छुट्टी भी नहीं मिलेगा।मोबाइल में हेलो हेलो कल कर लो। तबाही है तबाही।
शिक्षक विद्यालय में बच्चों के बदले करोना की ओर टकटकी लगाए हैं। उधर बच्चों के बदमाशी से दुखवा की मा परेशान है। बार-बार फोन लगाती है- हलो, मास्टर साहेब बोल रहे हैं । आवाज आती है हां हां मास्टर साहेब बोल रहे हैं, कहिए क्या बात है? मास्टर साहेब परनाम । प्रणाम-प्रणाम कहिए कौन? हम विश्वास टोला से। दुखा की मा बोल रहे हैं। मास्टर साहेब स्कूल कबतक खुल रहा है, घर में कोई भी लइका बच्चा पढवे नहीं करता है, खाली मोबाइल में लगा रहता है। कुछ कहते हैं त कहता है कि देखती नहीं है, करोना है सब काम बंद है। सरजी मोबाइल पर पढ़ाते हैं त आधा समझ में आता है आधा अईबे नहीं करता है। मास्टर साहेब ई करोना कहिया (कबतक) तक रहेगा। मास्टर साहेब-अरे मत बोलिए, करोना तो सबकुछ बर्बाद कर दिया है, कबतक जाएगा कहना मुश्किल है। ऐसे कल से कोई भी एक शिक्षक विद्यालय में रहेंगे और हां चावल लेने परसों से आ जाइएगा । त दुखा को भेजेंगे? अरे न भाई, ऐसा नहीं कीजिएगा। कोई मिडिया वाला देख लेगा त बड़ा मुश्किल हो जाएगा। अभी सभी लोग घर में ही रहिए। बाहर होने से जहां भीड़ लगेगा तो करोना पहुंचे या न पहुंचे लेकिन पुलिस जरूर पहुंच जाएगी जो करोना से भी ज्यादा खतरनाक होगा। उसकी जो इच्छा होगी वही करेगी उसका मन करेगा पिटने का तो पिटेगी, जुर्माना लगाएगी, कान पकड़कर उठक
बैठक करवा कर बेइज्जत कर देगी। अब फोन रखते हैं प्रणाम। परनाम।
उधर न्यायालय में जज साहब को करोना हो गया।कोर्ट कचहरी बंद। इससे वकील मोवक्कील सब परेशान। वकील मोवक्कील मोबाइल पर बात कर रहे हैं। हेलो, हेलो वकील साहब,प्रणाम हम बोल रहे है रमेश सिंह, डगरूआ से। । केस के तारीख का क्या हुआ? वकील साहब- अरे भाई अभी तो करोना है न, सब कुछ बंद है अभी घर में रहिए, निकलिए मत, तारीख जब आएगा तब पता चल जाएगा। वकील साहब बेल नहीं न टुटेगा। वकील साहब— अरे नहीं-नहीं, हम है न, कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। ठीक है वकील साहब प्रणाम।
उधर घर में बिक्कू बेचैन है। हमेशा घर में बैठे रहो, न खेलने जाओ न पढ़ने। न कहीं घूमने जाओ। मम्मी कहती हैं टिवी देखो। टिवी में क्रिकेट है ही नहीं। गेट के बाहर जाओ या दोस्तों को अपने घर बुलाओ तो पापा डांटते हैं कहते हैं देख नहीं रहा है क्या। हर जगह करोना है। न किसी के यहां जाओ न किसी को अपने यहां बुलाओ। न खेलने जाओ, चुपचाप घर में पड़े रहो। यह भी कोई जिंदगी है।
अब खेत खलिहान में चलते हैं। गेंहू की बालियां पक चुकी है। विक्टर यादव मजदूरों के यहां जाता है। (प्यार से बोलता है) क्या हाल है मंगल। मंगल के कुछ कहने पहले फटकन टपक पड़ता है। फटकन- क्या होगा,देख रहे हैं न,आदमी महक रहा है। दूरे रहिए,नाक मुंह को ढकिए। विक्टर भैया जरा सोचिए क्या समय आ गया। आदमी नाक मुंह ढकले रहेगा तो खाएगा पीएगा कैसे। क्या जमाना आ गया है। विक्टर हां में हां मिलाता है। तभी मंगल पूछता है विक्टर चा कैसे आए है। विकटर-‍ क्या कहें खेते से आ रहे हैं। गेंहू पक गया है, काटना जरूरी है। तभी हरखेली वाली घर से बाहर निकल कर बोलती है । आपको अपने टा चिंता है। टिवी नहीं देखते है क्या। सरकार बोला है घर से बाहर निकलना नहीं है। राशन फ्री मिलेगा, गैस भी फ्री उपर से एक हजार रूपया भी। जब खर्ची घर में त बाहर जाने का कोई मतलब नहीं है। मंगल भी हां में हां मिलाता है। विक्टर अपना सा मुंह लेकर लौटने लगे। रास्ते में आनंदी यादव से मुलाकात हुई। कहां से आ रहें हैं विक्टर बाबू। क्या बोले भैया सोचे कि गेहूं कटवा लें लेकिन कोई भी जन आने को तैयार नहीं है। आप कहां। हमको भी मकई में पानी देना था सो जा रहे हैं किसी को पकड़ लाएंगे। करोना से तो कुछ नहीं होगा लेकिन डरा कर मार देगा। पुरा खेती बर्बाद हो रहा है। उपर से केसीसी को जमा करने का भी समय है। कहां से देंगे पैसा एकदम सही बोल रहे हैं भैया।
इस प्रकार करोना ने पुरे संसार को प्रभावित कर रखा है। हर कोई पीड़ित है।अगर कोई अप्रभावित है तो वे है नेता जी जिन्हें सिर्फ सरकार बनाने और गिराने की चिंता है, चुनाव की चिंता है। नारे लगाए जा रहे हैं तुम हमें वोट दो हम तुम्हें करोना देंगे। जनता के जान-माल से कोई सरोकार नहीं है।वाह क्या कमाल का है वायरस करोना।

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