Society

राजकुमारी नहीं, कलिंग कुमारी कहो


कहां है मेरे पिता का हत्यारा मगध सम्राट अशोक———कलिंग युद्ध में अचानक कलिंग दुर्ग का फाटक खुलता है , एक विरांगना घोड़े पर सवार होकर हाथ में कृपाण लिए सम्राट अशोक को ललकारती हुई आई। इस कथा को ढाई हजार साल हो गए। लोग आज भी उस विरांगना को भूल नहीं पाए हैं जिसने शक्तिशाली मगध नरेश को सदा के लिए निस्तेज कर दिया । इस किस्से की पुनरावृत्ति हुई पुर्णिया के एक छोटे से गांव में, जहां महादलित परिवार में जन्मी राजकुमारी ने न केवल अपने पिता के हत्यारे को जेल के सलाखों के अंदर करवाया बल्कि गुंगी बहरी पुलिस को भी कार्रवाई करने के लिए विवश कर दी। परिवार महादलित है शिक्षा से दूर दूर तक का कोई नाता नहीं है। सुअर पालन करके परिवार का भरण-पोषण होता है। पुरे गांव की आबादी दस हजार है जिसमें लगभग नौ हजार मुसलमानों की संख्या है थोड़ी सी हिन्दू आबादी है। स्वाभाविक रूप से गांव में मुस्लिमो का दबदबा है, हिन्दू सहमे रहते हैं। राजकुमारी का अकेला महादलित परिवार है। एक दिन उसके सुअर का एक छोटा सा बच्चा एक मुस्लिम के आंगन में चला गया इससे परिवार आगबबूला हो गया और उस सुअर के बच्चे को मार डाला। सुअर के उस नादान बच्चे की मौत से राजकुमारी सिसक उठी और पुछने लगी—-इस बच्चे को मारकर तुमलोगों को क्या मिला । बातों बातों में तकरार बढ गई। विरोधियों ने जमकर उसे पीटा। बेटी को पिटता देख बुजुर्ग पिता बचाने आया लेकिन नराधमो ने उस बुजुर्ग के उम्र की भी परवाह नहीं की । उस बुजुर्ग की तबतक पिटाई होती रही जबतक वह वेहोश न हुआ। परिवार के जो भी लोग उसे बचाने निकले उसमें कोई भी सही सलामत न रहा। पिता की अवस्था एवं परिजनों की स्थिति को देख वह विरांगना घबराई नहीं बल्कि अपना दुःख भूलकर अपने बेहोश पिता सहित सभी जख्मियों को लेकर अस्पताल पहुंची । अपनी क्षमतानुसार भरपूर ईलाज करायी लेकिन गरीबी इंसान की सबसे बड़ी बिमारी है। इस बीमारी में फंसकर राजकुमारी भी अपने पिता को बचा न सकी। तड़प तड़प कर अपने बाप को मरते देख वह पागल हो उठी। वह पुलिस पदाधिकारी के साथ साथ आम आदमी से भी अपने पिता की हत्या का इंसाफ मांगने लगी। उधर हत्यारे भी इन सबसे बेखबर न थे, अपने बचाव का प्रबंधन करने लगे। पुलिस से लेकर चिकित्सक तक के लिए धन का पिटारा खोल दिया। राजकुमारी सहित उसके घायल परिजनों के साथ साथ मृतक पिता पर भी भारतीय दंड विधान की धारा 307 का मुकदमा दर्ज करा दिया गया। कुछ अधिकारियों ने भी राजकुमारी को प्रलोभन दिया लेकिन राजकुमारी तो कलिंग कुमारी बन चुकी थी । उसके लिए प्रलोभन का कोई मतलब ही न था उसके जीवन का तो एक ही लक्ष्य था पिता के हत्यारे को जेल के सलाखों में भेजना। घटना की जांच पड़ताल के लिए पुलिस प्रशासन राजकुमारी के घर पहुंचा। नियम कानून का हवाला देते हुए अधिकारी ने बहुत प्यार से कहा अब तुम्हारे पापा को तो वापस नहीं लाया जा सकता है, बदले में तुम्हें जो चाहिए, मिलेगा। यदि तुम चाहो तो तुम्हें सरकारी नौकरी मिल जाएगी, आर्थिक मदद मिलेगी इसके अलावे भी तुम जो चाहो मिल सकती है। अधिकारी बार बार पुछ रहे थे और वह….वह एकटक अधिकारी को देख रही थी।बार बार अधिकारी द्वारा पुछने पर वह एकाएक दहाड़ उठी। सर ……र रुपए-पैसे, नौकरी- चाकरी से मेरा बाप मुझको वापस मिल जाएगा, बोलिए न । मुझे यह सब कुछ नहीं चाहिए, मुझे केवल, केवल इंसाफ चाहिए। अचानक उसके इस दुर्गा रुप देखकर अधिकारी हतप्रभ हो गए। राजकुमारी का यह रूप पुलिस को अन्दर तक तो हिला दिया लेकिन रिश्वत के मलाई के कारण कार्रवाई कुछ भी नहीं हुई। कुछ देर बाद अधिकारी कोरा आश्वासन देकर चलते बने। राजकुमारी तीन दिन तक तो जैसे तैसे पुलिस कार्रवाई का इंतजार करते रही किन्तु वह चौथे दिन बर्दाश्त नहीं कर पाई। पुछते पुछते पुलिस के आला अधिकारी के पास पहुंच गई, लेकिन पुलिस अधिकारी से उसकी भेंट न हो सकी। संयोग वश वहां अनेक अखबारनवीस भी थे लेकिन गरीबों की सुनता है कौन, कहानी सुनकर लोग उसे पागल समझ उसकी अनसुनी करने लगे। लेकिन जहां चाह है वहां राह है, एक छोटे समाचार पत्र के संवाददाता ने उसके करुण कहानी को अपने अखबार में जगह दी। प्रकाशित होते ही इस घटना ने समाज को झकझोर दिया, सोशल मीडिया के माध्यम से अब न्याय दिलाने की मांग उठने लगी। मामला दिल्ली तक पहुंच गया, फलस्वरूप पुलिस कार्रवाई करने को विवश हुई। सभी अपराधी जेल के अंदर गए। हत्यारे की बचने की सारी शक्ति धरी की धरी रह गई। जब हत्यारे की गिरफ्तारी की खबर राजकुमारी को मिली तब वह भोकार पारकर रोने लगी और सामने पड़ी पिता के समाधि से लिपट गई और कहने लगी आज न्याय हुआ ,पापा आपको समाधिस्थ करने वाले आज सलाख़ों में बंद हो गए। उधर ननुआ चिल्ला रहा था यह राजकुमारी नहीं कलिंग कुमारी है। सच में औरत यदि ठान ले तो उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है।


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